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Wednesday, 2 January 2019

दादूपंथ सम्प्रदाय


नक्की झील किस जिले में अवस्थित है?
   सिरोही
ऊंटों के देवता के रूप में किसकी पूजा की जाती है?
  पाबूजी की
मारवाड़ के मालदेव को किस युद्ध में शेरशाह से पराजय का सामना करना पड़ा?
   गिरी-सुमेल युद्ध
राजस्थान का कौन-सा जिला फारसी डिजाइन के गलीचों के लिए प्रसिद्ध है?
बीकानेर
मीणा जनजाति के लोग किस देवता की कभी झूठी कसम नहीं खाते?

Thursday, 5 July 2018

राजस्थान के मन्दिर


राजस्थान में मन्दिर स्थापत्य कला

  • मन्दिर शिल्प की दृष्टि से राजस्थान अत्यन्त समृद्ध है तथा उत्तर भारत के मंदिर स्थापत्य के इतिहास में उसका विशिष्ट महत्त्व है।
  • सामान्यतः एक अलंकृत प्रवेशद्वार होता है, उसे तोरण द्वार कहते हैं।
  • तोरण द्वार में प्रवेश करते ही उप मण्डप आता है।
  • उसके बाद में विशाल आंगन आता है, जिसे सभा मण्डप कहते हैं।

Tuesday, 3 July 2018

राजस्थान में 1857 की क्रांति

  • 1857 की क्रांति प्रारम्भ होने के समय राजपूताना में नसीराबाद, नीमच, देवली, ब्यावर, एरिनपुरा एवं खेरवाड़ा में सैनिक छावनियां थी।
  • मेरठ में हुए विद्रोह (10 मई,1857) की सूचना राजस्थान के ए.जी.जी. (एजेन्ट टू गवर्नर जनरल) जार्ज पैट्रिक लॉरेन्स को 19 मई, 1857 को मिली।

Sunday, 1 July 2018

राजस्थानी साहित्य की प्रमुख कृतियां



  • कृति          रचनाकार


  1. कान्हड़दे प्रबन्ध           पद्मनाभ
  2. अचलदास खींची री बचनिका   गाडण शिवदास
  3. कुवलयमाला   उद्योतन सूरि
  4. वंश भास्कर   सूर्यमल्ल मिश्रण
  5. सती रासो          सूर्यमल्ल मिश्रण
  6. बीसलदेव रासो                  नरपति नाल्ह
  7. खुमाण रासो  दलपति विजय
  8. राम रासो          माधोदास दधवाड़िया
  9. विजयपाल रासो          नल्लसिंह
  10. पृथ्वीराज रासो  चन्द बरदाई
  11. हम्मीर रासो व हम्मीर काव्य सारंगदेव (जोधराज)
  12. सेनाणी व चंवरी         मेघराज मुकुल
  13. हालां झाला री कुण्डलियां ईसरदास
  14. एकलिंग महाकाव्य महाराणा कुम्भा
  15. हम्मीर महाकाव्य नयन चंद सूरि
  16. प्रबन्ध कोष राजशेखर
  17. अमरकाव्य वंशावली रणछोड़ भट्ट
  18. राज रत्नाकर, राजविनोद भट्ट सदाशिव
  19. ढोला मारवाड़ी चड़पड़ी कवि हरराज
  20. बेलि क्रिसण रूकमणि री पृथ्वीराज राठौड़
  21. मुहणोत नैणसी री ख्यात मुहणोत नैणसी
  22. पृथ्वीराज विजय         जयानक
  23. ढोला मारू रा दूहा कल्लोल
  24. ढोला मारवण री चौपाई कुशललाभ
  25. राजस्थानी कहावतां मुरलीधर व्यास
  26. रूठी राणी केसरी सिंह बारहठ
  27. राज रूपक वीरभाण
  28. राव जैतसी रो छंद सूजा जी
  29. राजवल्लभ मण्डन
  30. सूरज प्रकाश - करणीदान
  31. पाबूजी रा छंद, गोगाजी रसावली- बीठु मेहा
  32. नरसी रा मायरौ         रतना खाती
  33. अमरकाव्य अमरदान लालस
  34. प्रबन्ध चिंतामणि         मेरुतुंग
  35. बैराग्य सागर नागरीदास
  36. गंगा लहरी          पृथ्वीराज राठौड़
  37. पातल व पीथल        कन्हैयालाल सेठिया
  38. डिंगल कोष मुरारिदान
  39. बातां री फुलवारी विजयदान देथा
  40. गुण रूपक केशवदास
  41. राव अमर सिंह जी रा दूहा केशवदास
  42. रागमंजरी, रागमाला पुण्डरीक विट्ठल
  43. संगीतराज         कुंभा


Tuesday, 8 May 2018

राजस्थान के मध्यकालीन प्रमुख ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थल


जयपुर
  • भारत का पेरिस एवं गुलाबी नगर नाम से प्रसिद्ध जयपुर की स्थापना 1727 में सवाई जयसिंह के द्वारा की गई थी।
  • कछवाहा राजाओं की इस राजधानी का महत्व अपने स्थापना काल से ही रहा है। यहाँ के स्थापत्य में राजपूत एवं मुगल स्थापत्य का मिश्रण देखा जा सकता है। यहाँ का सिटी पैलेस जयपुर के राजपरिवार का निवास स्थल रहा है।
  • सिटी पैलेस के पास ही गोविन्ददेवजी का मन्दिर है,

Saturday, 24 February 2018

राजस्थान के प्रमुख उद्योग-धंधे

सूती वस्त्र उद्योगः-
  • राजस्थान का सबसे पुराना एवं वृहद् उद्योग सूती वस्त्र उद्योग है। 
  • 1949 में राज्य में 7 सूती वस्त्र मिलें थी, जिनकी संख्या बढ़कर वर्तमान में 23 हो गई है।
  • वर्तमान में राज्य में 17 मिलें निजी क्षेत्र, 3 सार्वजनिक क्षेत्र (दो ब्यावर, एक विजयनगर में) तथा 3 सहकारी कताई मिलें (गुलाबपुरा, गंगापुर व हनुमानगढ़) कार्यरत हैं।

राजस्थान की जलवायु और उसकी प्रमुख विशेषताएं



  • राजस्थान की जलवायु शुष्क से उप-आर्द्र मानसूनी जलवायु है।
  • अरावली के पश्चिम में निम्न वर्षा, उच्च दैनिक एवं वार्षिक तापान्तर, निम्न आर्द्रता तथा तीव्र हवाओं युक्त शुष्क जलवायु है।
  • दूसरी ओर अरावली के पूर्व में अर्द्धशुष्क एवं उप-आर्द्र जलवायु है।

Wednesday, 21 February 2018

राजस्थान चित्रकला की शैली

  • राजस्थानी चित्रशैली का पहला वैज्ञानिक विभाजन आनन्द कुमार स्वामी ने सन् 1916 ई. में अपनी पुस्तक राजपूताना पेन्टिंग्समें प्रस्तुत किया।
  • भौगोलिक एवं सांस्कृतिक आधार पर राजस्थान चित्रकला की शैलियों का वर्गीकरण
  • मेवाड चित्रशैली (स्कूल):- उदयपुर, चांवड, नाथद्वारा, देवगढ

मारवाड़ का राठौड़ वंश



  • राजस्थान के उत्तरी और पश्चिमी भागों में राठौड़ राज्य स्थापित थे। इनमें जोधपुर और बीकानेर के राठौड़ राजपूत प्रसिद्ध रहे हैं। जोधपुर राज्य का मूल पुरुष राव सीहा था, जिसने मारवाड़ के एक छोटे भाग पर शासन किया। परन्तु लम्बे समय तक गुहिलों, परमारों,

राजस्थान में हुए प्रमुख जौहर एवं साके


  • राजपूताना में प्राचीन काल में जब युद्ध हुआ करते थे तो राजपूत वीरांगनाओं द्वारा अग्निकुंड या पानी में कूदकर जान दे देना जौहर कहलाता है।
  • इसी प्रकार राजपूत वीर केसरिया रंग के वस्त्र पहनकर युद्धभूमि में ही वीरगति को प्राप्त हो जाना केसरिया कहलाता है। 
  • जब जौहर और केसरिया दोनों एक साथ होते हैं, तब उसे साका कहते हैं। 
  • जब कभी जौहर व केसरिया में से कोई एक ही हो, तब उसे अर्द्ध साका कहते हैं।


क्यो होते थे साका व जौहर


  • मध्यकालीन राजस्थान में जब तुर्क और मुगलों के आक्रमण हुए तब राजपूतों ने इसके प्रतिउत्तर में कड़ा प्रतिरोध किया। राजपूत प्रारम्भ से ही अपने स्वाभिमान और वीरता के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणोत्सर्ग करने में हिचकिचाहट महसूस नहीं की। 
  • यही नहीं राजपूताने की वीरांगनाएं भी अपनी आनबान की रक्षा के लिए प्रसिद्ध रही है। वे अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अग्नि व जल में कूदकर जान दे देना ही उचित समझती थी। क्योंकि कोई भी विदेशी आक्रमणकारी पराजित राजाओं की प्रजा व महिलाओं के साथ जबरदस्ती करते थे। इससे बचने के लिए वे रानियों के साथ जौहर कर लेती थी।


प्रमुख साके:-


रणथम्भौर का साका -


  • यह राजस्थान का पहला साका था। 1301 ई. में हम्मीर देव चौहान के समय दिल्ली सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण कर दिया। इस पर आक्रमण का कारण हम्मीर देव की शरणागत की रक्षा करने की हठधर्मिता थी जो उन्होंने खिलजी के विरोधी को शरण दी थी। राजपूतों ने केसरिया पहना तो महिलाओं ने जल जौहर किया।


मेवाड़ के प्रमुख साके
  • चित्तौड़गढ़ का पहला साका 1303 ई. में हुआ जो दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हुआ था। इस समय यहां का शासक रावल रत्नसिंह था। 
  • अलाउद्दीन ने धोखे से रत्नसिंह को कैद कर लिया और बदले में रानी पद्मिनी को मांगा लेकिन राजपूत वीरों ने केसरिया बाना पहनकर वीरता पूर्वक लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए और रानी ने 1600 महिलाओं के साथ जौहर कर लिया। खिलजी ने दुर्ग का नाम खिज्राबाद रख दिया।
  • 1534 ई. में चित्तौड़गढ़ का दूसरा साका गुजरात के शासक बहादुरशाह के आक्रमण पर हुआ। इस समय राजमाता कर्मावती ने जौहर किया।
  • 1567-68 ई. में मुगल बादशाह अकबर के समय उदयसिंह यहां का शासक था। इसमें जयमल राठौड़ और पत्ता वीरगति को प्राप्त हुए तथा राजपूत वीरांगनाओं ने जौहर किया।

जैसलमेर के प्रमुख साके


  • जैसलमेर में पहला साका अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हुआ था। जैसलमेर के शासक रावल मूलराज व कुंवर रतनसी वीरगति को प्राप्त हुए एवं वीरांगनाओं ने जौहर किया।

दूसरा साका - 

  • फिरोजशाह तुगलक के समय हुआ।
  • इस समय रावल दूदा व त्रिलोकसी के नेतृत्व में राजपूत ने युद्ध लड़ा

तीसरा साका -

  • यह अर्द्ध साका था जो 1550 ई. में कंधार के अमीर अली पठान के आक्रमण के समय रावल लूणकरण अन्य वीर योद्धओं के साथ वीरगति को प्राप्त हुए।


सिवाना दुर्ग के साके -

पहला साका 1309 ई. में 

  • अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया। इसे जीतकर इसका नाम खैराबाद रखा।
  • शासक सातलदेव था जो वीरगति को प्राप्त हुआ।


दूसरा साका -
  • अकबर के समय में हुआ।
  • शासक कल्लाजी वीरगति को प्राप्त हुए 
  • वीरांगनाओं ने जौहर किया।


जालोर का साका
  • 1311-12 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने जालोर पर आक्रमण कर दिया जिसके प्रतिरोध में जालोर के शासक कान्हड़देव चौहान व उनके पुत्र वीरमदेव ने बड़ी बहादुर के साथ प्रतिरोध किया और वीरगति को प्राप्त हुए। राजपूत वीरांगनाओं ने जौहर किया। 
  • अलाउद्दीन ने दुर्ग को जीतकर उसका नाम जलालाबाद रख दिया। 
  • इसका घटना का वर्णन पद्मनाभ द्वारा रचित कान्हड़देव प्रबंध नामक ग्रंथ में मिलता है।


गागरोन के साके

पहला साका 1423 ई. में 

  • मांडू के सुल्तान अलपखां गौरी (होशंगशाह) ने आक्रमण किया।
  • गागरोन के शासक अचलदास खींची ने प्रतिरोध किया।
  • इसका वर्णन शिवदास गाढण ने अचलदास ‘खींची री वचनिका’ में किया।

दूसरा साका 1444 ई. में

  • मांडू शासक सुल्तान महमूद खिलजी ने आक्रमण किया।
  • गागरोन का शासक पल्हणसी खींची था
  • वीरांगनाओं ने जौहर किया।
  • महमूद खिलजी ने गागरोन का नाम मुस्तफाबाद रखा था।


दुनिया के वे देश जिनका रक्षा बजट है सबसे अधिक

1 फरवरी, 2019 को भारत के वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया और उसमें अपने देश की सुरक्षा के लिए रक्षा बजट का आवंटन तीन लाख...